2 Life Lessons From RamCharitManas - रामचरितमानस से 2 जीवन पाठ

2 Life Lessons From RamCharitManas - रामचरितमानस से 2 जीवन पाठ

There are a few Chaupai in Tulsidas's Ramcharitmanas that tells us what kind of person we should NOT talk to. If you talk, apart from wasting time, you can also get into trouble.

These Chaupai have been quoted by Lord Shri Ram himself. Let us know who are those people and what are those things.

तुलसीदास कृत रामचरितमानस में 5.58 चौपाई ऐसी है जो हमें यह बताती है कि किस तरह के इंसान से बात नहीं करना चाहिए।

यदि आप बात करेंगे तो समय बर्बाद करने के साथ ही मुसीबत में भी फंस सकते हो। यह दोहा और चौपाई प्रभु श्रीराम के मुख से उद्धृत हुआ है। आओ जानते हैं कि कौन हैं वे इंसान और कौनसी हैं वे बातें।

5.58 चौपाई
लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू।।
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती। सहज कृपन सन सुंदर नीती।। [1]

हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूँ। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),॥1॥

Lakshman, bring Me My bow and arrows; I will dry up the ocean with a missile presided over by the god of fire. Supplication before an idiot, friendship with a rogue, inculcating liberality on a born miser,॥1॥

Interpretation

Lord Shriram says that one should not talk politely to a fool. No foolish person understands the prayer of others, because he is of a dull mind. Foolish people can be made to work only by intimidating them.

प्रभु श्रीराम कहते हैं कि मूर्ख से विनयपूर्वक बात नहीं करना चाहिए। कोई भी मूर्ख व्यक्ति दूसरों की प्रार्थना को समझता नहीं है, क्योंकि वह जड़ बुद्धि होता है। मूर्ख लोगों को डराकर ही उनसे काम करवाया जा सकता है।

The second thing is that one should not talk lovingly with a person with a crooked nature. Such a person is not worthy of love. They always hurt others and trusting them is dangerous. They can put others in trouble for their selfishness. Therefore, one should not talk lovingly to a crooked person.

दूसरा है कुटिल स्वभाव वाले व्यक्ति के साथ प्रेमपूर्वक बात नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति प्रेम के लायक नहीं होता। यह सदैव दूसरों को कष्ट ही देते हैं और इन पर भरोसा करना घातक होता है। ये अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को संकट में डाल सकते हैं। अत: कुटिल व्यक्ति से प्रेम पूर्वक बात नहीं करनी चाहिए।

The third is a miserly beautiful policy, that is, generosity or preaching does not work with a miser/greedy person. He is greedy for money. Therefore, one should not expect any help or donation from him. Talking to a miser like this is a simple waste of time.

तीसरा है कंजूस से सुंदर नीति अर्थात उदारता या उपदेश से काम नहीं चलता है। वह धन का लालची होता है। अत: उससे किसी की मदद या दान की अपेशा नहीं करना चाहिए। कंजूस से ऐसी बात करने पर हमारा ही समय व्यर्थ होगा।

5.58 चौपाई
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी।।
क्रोधिहि सम कामिहि हरि कथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा।। [2]

ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान्‌ की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात्‌ ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥2॥

Talking wisdom to one steeped in worldliness, glorifying dispassion before a man of excessive greed, a lecture on mind control to an irascible man and a discourse on the exploits of Sri Hari to a libidinous person are as futile as sowing seeds in a barren land.॥2॥

Interpretation

Never talk of knowledge to a person trapped in affection. He can never differentiate between truth and falsehood. Because of Mamta, he harms himself and others too.

ममता में फंसे हुए व्यक्ति से कभी भी ज्ञान की बात न करें। वह कभी भी सत्य और असत्य में भेद नहीं कर पाता है। ममता के कारण वह खुद का और दूसरों का भी नुकसान कर बैठता है।

Similarly, it is futile to describe the glory of renunciation or disinterest in front of a very greedy person. Such people can never become renunciates or renunciates.

इसी तरह अति लोभी व्यक्ति के समक्ष त्याग या वैरोग्य की महिमा का वर्णन करना व्यर्थ है। ऐसे लोग कभी भी त्यागी या वैरागी नहीं बन सकते हैं।

It is futile to talk about peace with a person who gets angry all the time. He forgets everything in anger or passion. In a fit of anger, a person cannot differentiate between good and bad things.

जिस व्यक्ति को हर समय क्रोध आता रहता है उससे शांति की बातें करना व्यर्थ है। वह क्रोध या अवेश में सबकुछ भूल जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अच्छी-बुरी बातों में भेद नहीं कर पाता है।

In the end there is a lustful person. One should never talk about God in front of a person full of lust. Such a person does not even understand relationships and age and forgets the dignity.

अंत में कामी व्यक्ति होता है। वासना से भरे व्यक्ति के समक्ष कभी भी भगवान की बातें नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को रिश्तों और उम्र की भी समझ नहीं होती है और वह मर्यादा को भूला देता है।

जय श्री राम || 🏹🚩